tag:blogger.com,1999:blog-15215831.post-1131606415225869242005-11-09T21:22:00.000-08:002005-11-09T23:06:55.270-08:00श्वानों को मिलते दूध वस्त्र<br />भूखे बालक अकुलाते हैं।<br />मां की हड्डी से चिपक ठिठुर<br />जाडे की रात बिताते हैं।<br />युवती की लज्ज वसन बेच<br />जब ब्याज चुकये जाते हैं।<br />पापी ्महलों का अहंकार<br />तब देता मुझको आमंत्रण।<br />झन झन झन झन<br />झन झनन झनन।<br />-दिनकरshabdahttp://www.blogger.com/profile/07961528262493927188noreply@blogger.com