परिनदे अब भी पर तोले हुये हैं।
हवा में सन्सनी घोले हुयें हैं॥
हमरा कद सिमत कर रह गया है।
हमारे पैरहन झोले हुये हैं॥
हमारे हाथ तो काटे गये थे।
हमारे पैर भी छोले हुये हैं॥
चढाता फिर रहा हूं जो चढावे।
तुम्हारे नाम पर बोले हुयें हैं॥
-दुष्यंत
हवा में सन्सनी घोले हुयें हैं॥
हमरा कद सिमत कर रह गया है।
हमारे पैरहन झोले हुये हैं॥
हमारे हाथ तो काटे गये थे।
हमारे पैर भी छोले हुये हैं॥
चढाता फिर रहा हूं जो चढावे।
तुम्हारे नाम पर बोले हुयें हैं॥
-दुष्यंत

1 Comments:
प्रयास अच्छा है, मगर वर्तनी पर ध्यान देंगे तो ज्यादा मज़ा आएगा.
Post a Comment
<< Home